पटना, 19 अप्रैल 2026

बिहार में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शराबबंदी कानून को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि राज्य में शराबबंदी जारी रहेगी और इसे हटाने या पुनर्विचार करने का कोई सवाल नहीं उठता। इस बयान से शराबबंदी खत्म होने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को बड़ा झटका लगा है।

NDA के भीतर मतभेद के बावजूद फैसला कायम

शराबबंदी को लेकर एनडीए गठबंधन के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही थी। लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने इसकी समीक्षा की बात कही थी, वहीं अन्य नेताओं ने भी कानून में बदलाव के सुझाव दिए थे। बावजूद इसके, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया।

“नीतीश नीति” पर कायम रहने का संकेत

सम्राट चौधरी का यह फैसला पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों पर चलने की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि सुशासन और सामाजिक सुधार की दिशा में शराबबंदी अहम भूमिका निभाती है, इसलिए इसे जारी रखा जाएगा।

महिला वोट बैंक और सामाजिक संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शराबबंदी बनाए रखना सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से अहम है। यह कानून खासकर महिलाओं के बीच लोकप्रिय रहा है, क्योंकि इसे घरेलू हिंसा और अपराध कम करने से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में सरकार इस समर्थन को बनाए रखना चाहती है।

क्रियान्वयन पर उठते रहे सवाल

हालांकि, कुछ नेताओं ने कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि जमीनी स्तर पर कई समस्याएं हैं। बावजूद इसके, सरकार ने साफ कर दिया है कि नीति में बदलाव नहीं होगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर इसके क्रियान्वयन को और मजबूत किया जाएगा।

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