रायपुर, 12 जुलाई 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में तेजी से नई पहचान बना रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा लागू किए गए 435 प्रशासनिक सुधारों ने शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाया है। इन सुधारों से आम नागरिकों, किसानों, उद्यमियों, निवेशकों और युवाओं को सरकारी सेवाएं पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और प्रभावी तरीके से उपलब्ध हो रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन को केवल नीति नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली बनाया है। भूमि प्रबंधन, राजस्व प्रशासन, शिकायत निवारण, ऑनलाइन सेवाएं, औद्योगिक निवेश, पंजीयन व्यवस्था और डिजिटल कृषि सहित लगभग हर क्षेत्र में व्यापक सुधार लागू किए गए हैं। इनका उद्देश्य नागरिकों का समय और संसाधन बचाने के साथ सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाना है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा प्रशासन विकसित करना है, जहां नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें और सभी सेवाएं समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हों। डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।
डिजिटल गवर्नेंस से बदली प्रशासन की कार्यशैली
राज्य सरकार ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग के गठन के साथ प्रशासनिक निगरानी को नई दिशा दी है। 25 दिसंबर 2023 को शुरू किए गए अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम पोर्टल के जरिए योजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग और फाइलों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था मजबूत हुई है। इससे प्रशासनिक निर्णयों में तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी भरोसे का माध्यम
राज्य सरकार की मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आज जनता और शासन के बीच प्रभावी संवाद का माध्यम बन चुकी है। इस व्यवस्था से 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हैं और 1195 श्रेणियों की शिकायतों का समाधान किया जाता है। प्रत्येक शिकायत को यूनिक आईडी दी जाती है, जिससे नागरिक उसकी ऑनलाइन स्थिति देख सकते हैं। असंतोष की स्थिति में शिकायत स्वतः उच्च स्तर पर पहुंच जाती है।
सेवा सेतु से घर बैठे मिल रहीं 520 सरकारी सेवाएं
सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 520 सेवाएं एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रदेशभर के 16,726 सेवा2 केंद्रों के जरिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 37.52 लाख का सफल निराकरण किया जा चुका है। 94.3 प्रतिशत सफलता दर इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
उद्योगों के लिए आसान हुई निवेश प्रक्रिया
राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू कर निवेशकों के लिए अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल और पूरी तरह डिजिटल बनाया है। इसके साथ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कक्ष की स्थापना, जीएसटी पंजीयन सहायता, 24×7 दुकान संचालन की अनुमति और एमएसएमई मंत्रालय के गठन की घोषणा से उद्योग और व्यापार को नई गति मिली है।
पंजीयन व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार
राज्य सरकार ने ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल दस्तावेज़ खोज, सुगम ऐप और डिजिटल नकल सुविधा जैसी सेवाएं शुरू कर संपत्ति पंजीयन प्रक्रिया को आसान बनाया है। 28 अप्रैल 2026 से 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त कर आम नागरिकों को राहत दी गई है। वहीं नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला स्मार्ट पंजीयन कार्यालय शुरू किया गया है, जहां 12 से 15 मिनट में संपत्ति की रजिस्ट्री पूरी हो रही है।
भूमि सुधारों को मिली राष्ट्रीय पहचान
डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम, जियो-रेफ्रेंसिंग तकनीक, ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना और डिजिटल संपत्ति कार्ड जैसी पहल से भूमि प्रबंधन अधिक पारदर्शी बना है। भूमि सुधार और एग्रीस्टैक के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को ₹598 करोड़ की विशेष सहायता प्रदान की है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वास जताया कि सुशासन, डिजिटल प्रशासन और तकनीक आधारित नवाचार के जरिए छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा। प्रशासनिक सुधारों की यह यात्रा विकसित भारत-2047 और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई गति देने का कार्य कर रही है।


