रायपुर, 06 अप्रैल 2026
ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को लेकर नई कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 45 दिन के संभावित युद्धविराम (सीजफायर) पर बातचीत चल रही है, जो आगे स्थायी समाधान का रास्ता खोल सकती है। हालांकि अगले 48 घंटों में किसी आंशिक समझौते की संभावना फिलहाल कमजोर बताई जा रही है।
मध्यस्थ देशों की भूमिका अहम
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अप्रत्यक्ष रूप से संदेशों के माध्यम से हो रही है, जिसमें दोनों पक्षों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हैं।
दो चरणों में हो सकता है समझौता
प्रस्तावित योजना के तहत पहले चरण में 45 दिन का युद्धविराम लागू किया जाएगा, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। दूसरे चरण में युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए औपचारिक समझौता किया जा सकता है। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ था।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना मुख्य मुद्दा
Strait of Hormuz को फिर से खोलना इस वार्ता का प्रमुख मुद्दा है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही ईरान के यूरेनियम भंडार को लेकर भी समाधान खोजने की कोशिश की जा रही है।
ट्रंप की चेतावनी और सैन्य दबाव
Donald Trump ने चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा तक समझौता नहीं हुआ तो ईरान के बुनियादी ढांचे पर बड़े हमले किए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई की योजना तैयार है, लेकिन फिलहाल उसे रोका गया है।
संघर्ष जारी रहने पर बढ़ेगा संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर और गहरा होगा। हाल ही में ईरान द्वारा खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों और जहाजों पर हमले से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।


