रायपुर, 14 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले का औराटोला गांव अब ‘लखपति ग्राम’ के रूप में पहचान बना रहा है, जहां हर घर की महिला सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय अर्जित कर रही है। ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर इस गांव को लखपति ग्राम घोषित किया गया है, जबकि राज्य स्तर पर औपचारिक घोषणा का इंतजार है।

65 महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’

गांव के 65 परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जुड़कर ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। छह समूहों की इन 65 महिलाओं ने आधुनिक कृषि, पशुपालन, मशरूम उत्पादन और लघु उद्यमों के जरिए अपनी आय बढ़ाई है।

प्रशिक्षण और संसाधनों से बदली तस्वीर

जिला प्रशासन और आजीविका मिशन के सहयोग से महिलाओं को प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता मिली, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकीं। गांव में आजीविका सखियों और पशु सखियों ने घर-घर जाकर तकनीकी जानकारी देकर इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई।

अन्य गांवों के लिए बना मॉडल

औराटोला का यह मॉडल अब अन्य ग्राम पंचायतों के लिए प्रेरणा बन रहा है। आसपास के गांवों के लोग यहां आकर इस मॉडल को समझ रहे हैं और अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।

मत्स्य पालन और खेती से बढ़ी आय

गांव की कुमेश्वरी मसिया ने मत्स्य पालन और सब्जी खेती के जरिए सालाना करीब 1.17 लाख रुपये की आय हासिल की है। वहीं लोकेश्वरी साहू ने पशुपालन, मशरूम उत्पादन और सिलाई कार्य के माध्यम से हर महीने 11 हजार रुपये से अधिक की कमाई शुरू कर दी है।

जिले में 20 हजार से ज्यादा ‘लखपति दीदी’

बालोद जिले में अब तक 20,982 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश कर रही हैं।

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