नई दिल्ली, 2 मई 2026

भारत की रक्षा क्षमता को नई मजबूती देने की दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन हाइपरसोनिक ग्लाइड और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणालियों पर तेजी से काम कर रहा है। DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने बताया कि दोनों प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है, जिसमें हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल विकास के मामले में ज्यादा आगे है और इसका परीक्षण जल्द शुरू हो सकता है।

क्या है दोनों मिसाइलों में अंतर
समीर वी कामत के अनुसार, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन होता है, जो उड़ान के दौरान लगातार ऊर्जा प्रदान करता है। वहीं हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल को शुरुआत में बूस्टर से गति दी जाती है और उसके बाद यह बिना इंजन के ग्लाइड करती है।

जल्द हो सकता है पहला परीक्षण
DRDO प्रमुख ने संकेत दिए हैं कि ग्लाइड मिसाइल का परीक्षण पहले किया जाएगा, क्योंकि यह तकनीकी रूप से अधिक उन्नत चरण में पहुंच चुकी है।

अग्नि-6 परियोजना भी तैयार
इसके साथ ही DRDO ने अग्नि-6 मिसाइल परियोजना को लेकर भी तैयारी पूरी कर ली है और अब केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है। अग्नि-6 को एक उन्नत इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल माना जा रहा है, जिसकी मारक क्षमता मौजूदा सिस्टम से ज्यादा होगी।

रक्षा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा भारत
भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीकों पर काम कर रहा है। हाइपरसोनिक मिसाइलों का विकास देश की रणनीतिक शक्ति को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है।

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