लखनऊ, 19 अप्रैल 2026

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि यह बिल “दरारवादी राजनीति का काला दस्तावेज” था, जिसका उद्देश्य महिलाओं की एकता को तोड़ना था। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की एकजुटता ने बीजेपी के मंसूबों को विफल कर दिया और यह देश की जनचेतना की जीत है।

महिलाओं की एकता तोड़ने का आरोप

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा महिलाओं को बांटकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण बिल के जरिए नारी को केवल “नारा” बनाने की कोशिश की गई, जबकि वास्तविक सशक्तिकरण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

परिसीमन और जनगणना पर उठाए सवाल

सपा प्रमुख ने कहा कि परिसीमन के नाम पर यह बिल महिलाओं के अधिकारों को प्रभावित करने वाला था। उन्होंने मांग की कि पहले देश में जनगणना कराई जाए, उसके बाद ही परिसीमन और आरक्षण जैसे फैसले लिए जाएं। उनके अनुसार, बिना जनगणना के लाया गया यह बिल “आधा-अधूरा प्रयास” है।

PDA वर्ग की अनदेखी का आरोप

अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि यह प्रस्ताव लगभग 95 प्रतिशत पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग की महिलाओं के हितों के खिलाफ है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन “भाजपा की चालबाजी” के खिलाफ है।

लोकसभा में भी उठाया था मुद्दा

उन्होंने याद दिलाया कि लोकसभा में चर्चा के दौरान भी उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा महिला आरक्षण के बहाने नारी को नारा बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को वास्तविक और समावेशी प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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