13 मई 2026 | रायपुर

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न स्वतंत्र संगठनों के संयुक्त आह्वान पर मंगलवार को राष्ट्रीय मांग दिवस मनाया गया। इसी क्रम में राजधानी रायपुर के अंबेडकर चौक पर ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के नेतृत्व में श्रमिकों और कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन कर नोएडा, गुरुग्राम और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान श्रमिक नेताओं ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के शोषण, कम वेतन, असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और बढ़ते ठेकेदारीकरण को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

श्रमिकों के शोषण और दमन का लगाया आरोप

विरोध सभा को संबोधित करते हुए संयुक्त मंच के संयोजक और ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लाइज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मराज महापात्र ने कहा कि देशभर के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक अमानवीय परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरों को 10 से 13 घंटे तक काम कराया जा रहा है, लेकिन उन्हें मात्र ₹10,000 से ₹12,000 प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। साथ ही पीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम और साप्ताहिक अवकाश जैसी मूल सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है।

₹26 हजार न्यूनतम वेतन और 8 घंटे कार्यदिवस की मांग

ट्रेड यूनियनों ने न्यूनतम मजदूरी ₹26,000 प्रतिमाह करने, 8 घंटे का कार्यदिवस लागू करने, अतिरिक्त कार्य के लिए दुगुना ओवरटाइम भुगतान, ठेका श्रमिकों को समान वेतन और सुविधाएं देने तथा अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने चारों नए श्रम संहिताओं को वापस लेकर पुराने 44 श्रम कानूनों को बहाल करने की भी मांग की।

गिरफ्तार श्रमिकों की रिहाई की मांग

प्रदर्शन के दौरान ट्रेड यूनियनों ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मानेसर, गुरुग्राम और फरीदाबाद में आंदोलन कर रहे श्रमिकों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और गिरफ्तार मजदूरों की बिना शर्त रिहाई की मांग की। मंच ने सरकार से ट्रेड यूनियनों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित करने और भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाने की भी मांग की।

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