नई दिल्ली, 1 जून 2026

मई 2026 में देश का वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। हालांकि यह आंकड़ा अप्रैल 2026 के 2.43 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड संग्रह से कम है, लेकिन पिछले वर्ष मई की तुलना में शुद्ध GST संग्रह में 3.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल GST संग्रह 1,94,184 करोड़ रुपये रहा। इसमें CGST 37,397 करोड़ रुपये, SGST 45,143 करोड़ रुपये और IGST 1,11,644 करोड़ रुपये शामिल हैं। रिफंड के बाद शुद्ध GST संग्रह 1,66,904 करोड़ रुपये रहा।

अप्रैल की तुलना में बिक्री में कमी के संकेत

GST संग्रह मुख्य रूप से वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री पर आधारित होता है। अप्रैल की तुलना में मई में संग्रह कम रहने से संकेत मिलता है कि बाजार में बिक्री की रफ्तार कुछ धीमी रही। हालांकि केंद्र सरकार का दावा है कि जिन वस्तुओं पर पिछले वर्ष GST दरों में कटौती की गई थी, उनकी बिक्री में दहाई अंक की वृद्धि दर्ज की गई है।

घरेलू GST संग्रह आयात से पीछे

मई महीने में घरेलू बिक्री से प्राप्त GST राजस्व, आयात से प्राप्त GST की तुलना में कम रहा। इससे संकेत मिलता है कि आयात आधारित कर संग्रह का योगदान अपेक्षाकृत अधिक रहा।

कई राज्यों में GST राजस्व में गिरावट

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु सहित कई राज्यों के GST राजस्व में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में गिरावट दर्ज की गई।

राज्यों में गिरावट के प्रमुख आंकड़े:

  • दिल्ली – 17% गिरावट
  • हिमाचल प्रदेश – 27% गिरावट
  • उत्तराखंड – 19% गिरावट
  • तमिलनाडु – 15% गिरावट
  • असम – 13% गिरावट
  • बिहार – 7% गिरावट
  • पंजाब – 5% गिरावट

उत्तर प्रदेश बना सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर

बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जहां GST संग्रह में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा:

  • हरियाणा – 8% वृद्धि
  • मध्य प्रदेश – 1% वृद्धि
  • गुजरात – 1% वृद्धि
  • कर्नाटक – 1% वृद्धि

वहीं महाराष्ट्र और झारखंड में GST राजस्व वृद्धि शून्य रही।

अर्थव्यवस्था के लिए क्या हैं संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल की तुलना में GST संग्रह में कमी के बावजूद 1.94 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा मजबूत कर संग्रह को दर्शाता है। पिछले वर्ष की तुलना में शुद्ध संग्रह में बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि आर्थिक गतिविधियां अभी भी सकारात्मक बनी हुई हैं, हालांकि कुछ राज्यों में मांग और उपभोग की रफ्तार कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

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