नगर पालिका खैरागढ़ में प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है, जहां करीब 35 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई फायर ब्रिगेड वाहन पिछले कई वर्षों से गायब है। चौंकाने वाली बात यह है कि वाहन से जुड़ी खरीद फाइल भी पहले ही लापता हो चुकी है, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, अविभाजित राजनांदगांव जिले के दौरान गौण खनिज मद से नगर पालिका को दो किश्तों में करीब 35 लाख रुपये जारी किए गए थे। पहली किश्त में 13.13 लाख रुपये से वाहन का चेसिस खरीदा गया, जबकि दूसरी किश्त में 21 लाख रुपये से अधिक खर्च कर फायर ब्रिगेड वाहन को तैयार कराया गया। यह वाहन अक्टूबर 2020 में नगर पालिका को सौंपा गया था।

कुछ समय तक उपयोग में रहने के बाद वाहन अमलीडीह के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके बाद उसे मरम्मत के लिए भेजा गया। हालांकि, इसके बाद से यह वाहन अब तक वापस नहीं लाया गया है।

मामले में नगर पालिका ने वर्ष 2023 में उपभोक्ता फोरम में बीमा कंपनी के खिलाफ दावा दायर किया था, जिसके बाद करीब 8 लाख रुपये का सेटलमेंट भी हुआ। बावजूद इसके वाहन को वापस लाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बताया जा रहा है कि जिस गैरेज में वाहन खड़ा है, उसका किराया भी लगभग 7 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।

इस पूरे मामले पर खैरागढ़ के एडीएम Surendra Thakur ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है और सीएमओ से जवाब-तलब किया जाएगा।

फायर ब्रिगेड जैसी आवश्यक सेवा का वर्षों तक उपयोग से बाहर रहना और जिम्मेदार अधिकारियों का स्पष्ट जवाब न होना, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और गायब वाहन की स्थिति कब तक स्पष्ट होती है।

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