रायपुर, 19 अप्रैल 2026

धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सेरिखेड़ी में वर्षों से रह रहे आदिवासी परिवारों को बिना पूर्व सूचना, बिना पुनर्वास और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बेदखल किए जाने का मामला अब प्रदेशभर में राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इस घटना को लेकर क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है, वहीं कांग्रेस ने इसे गरीब और आदिवासी समुदाय के अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है।

कांग्रेस का आरोप—अमानवीय और आदिवासी विरोधी कार्रवाई

प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओबीसी विभाग) के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भावेश बघेल ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भाजपा सरकार का यह निर्णय आदिवासी और गरीब विरोधी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्षों से बसे परिवारों को अचानक उजाड़ देना न केवल अमानवीय है, बल्कि यह उनके जीवन, सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

“आदिवासी मुख्यमंत्री के बावजूद सुरक्षित नहीं समाज”

भावेश बघेल ने सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद यदि आदिवासी समाज ही सुरक्षित नहीं है, तो यह सरकार की बड़ी विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों को गरीबों के संघर्ष और पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है।

स्थानीय नेताओं ने भी जताया कड़ा विरोध

रायपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष पप्पू बंजारे ने इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार का दायित्व गरीबों के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उन्हें बेघर करना। वहीं कचना पार्षद प्रतिनिधि जयंत साहू, उपसरपंच शारदा ध्रुव और एनएसयूआई जिला उपाध्यक्ष संयम सिंह ठाकुर ने भी इस कदम का विरोध करते हुए तत्काल राहत और न्याय की मांग की।

पुनर्वास और मुआवजे की मांग, आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास, उचित मुआवजा, राशन-पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी।

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