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छत्तीसगढ़ की मनोहारी पर्यटन छटा से अभिभूत हुईं भारत सरकार की पूर्व पर्यटन महानिदेशक मीनाक्षी शर्मा

रायपुर, 15 जुलाई 2026

भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की पूर्व महानिदेशक मीनाक्षी शर्मा ने पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ का विस्तृत भ्रमण किया। 14 दिवसीय यात्रा के दौरान उन्होंने प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों का अवलोकन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ प्रकृति, संस्कृति, इतिहास, आध्यात्मिकता और रोमांच का अद्भुत संगम है और यह राज्य हर पर्यटक की यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत के पर्यटन क्षेत्र में कार्य करने के बावजूद पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ आने का अवसर मिला। यह यात्रा उनके लिए अविस्मरणीय रही और प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, घने वन, जलप्रपात, प्राचीन मंदिर, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और आत्मीय आतिथ्य ने उन्हें सकारात्मक रूप से प्रभावित किया।

यात्रा की शुरुआत उन्होंने रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन और जनजातीय संग्रहालय से की। इसके बाद भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल, छेरकी महल और आसपास के वन क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए उन्होंने भोरमदेव परिसर को भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण बताया।

इसके बाद उन्होंने अमरकंटक में मां नर्मदा उद्गम स्थल, कपिलधारा, दूधधारा जलप्रपात, कबीर चबूतरा, राजमेरगढ़ और जैन मंदिर का भ्रमण किया। वापसी में रतनपुर स्थित मां महामाया शक्तिपीठ में दर्शन कर प्रदेश की धार्मिक परंपराओं का अनुभव प्राप्त किया।

बस्तर प्रवास के दौरान उन्होंने चित्रकोट जलप्रपात, टाटामारी घाटी, कोंडागांव शिल्प ग्राम, नारायणपाल मंदिर, मेंदरी घुमर और तामड़ा घुमर जलप्रपात का भ्रमण किया तथा चित्रकोट में नौकायन का आनंद भी लिया। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय कला विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता रखती है।

उन्होंने दंतेश्वरी शक्तिपीठ, बारसूर, जगदलपुर पुरातत्व संग्रहालय, बस्तर राजमहल तथा स्थानीय हस्तशिल्प केंद्रों का भी अवलोकन किया। ढोकरा कला, बेलमेटल शिल्प, बांस और लकड़ी की कलाकृतियों को उन्होंने स्थानीय संस्कृति की जीवंत पहचान बताया।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में उन्होंने तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, धुड़मारास, बांस राफ्टिंग और केचला क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने इसे प्रकृति और साहसिक पर्यटन प्रेमियों के लिए स्वर्ग बताया।

यात्रा के दौरान उन्होंने ओडिशा के जैपुर, कोलाब बांध, जगन्नाथ मंदिर, कोरापुट कॉफी प्लांटेशन, देओमाली पर्वत, दुदमा जलप्रपात, बोंडा जनजातीय बाजार और कोटपाड़ बुनकर ग्राम का भी भ्रमण किया, जिससे बस्तर और कोरापुट क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिला।

अपने अनुभव साझा करते हुए मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि पर्यटन केवल किसी स्थान को देखने का माध्यम नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपराओं और लोगों से जुड़ने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं और यदि यहां के पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए तो राज्य देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में शामिल हो सकता है।

उन्होंने देश-विदेश के पर्यटकों से छत्तीसगढ़ आने का आग्रह करते हुए कहा कि यहां आने वाला हर पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन और आत्मीय आतिथ्य की अविस्मरणीय यादें अपने साथ लेकर जाएगा।

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