12 मई 2026 | गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति ‘बैगा’ के नाम पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरियां हासिल करने का मामला सामने आया है। बैगा समाज के लोगों ने इस कथित फर्जीवाड़े के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। समाज का आरोप है कि बिलासपुर जिले के ग्राम पोड़ी (सीपत) के करीब 55 लोगों ने कूटरचित दस्तावेजों के जरिए फर्जी ‘बैगा’ प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी सेवाओं में नियुक्ति हासिल की है।

150 से अधिक फर्जी नियुक्तियों का अंदेशा

अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस की राष्ट्रीय समन्वयक अर्चना पोर्ते और ‘नांगा बैगा जनशक्ति संगठन’ के नेतृत्व में पहुंचे समाज प्रतिनिधियों ने दावा किया कि वर्तमान में चिन्हित 55 लोग शिक्षक, हाईकोर्ट कर्मचारी, आर्मी, BSF, कृषि विभाग और स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। समाज ने आशंका जताई कि यदि इन लोगों के परिवारों और रिश्तेदारों की जांच की जाए तो फर्जी नियुक्तियों की संख्या 150 से 200 तक पहुंच सकती है।

असली बैगा युवाओं का हक मारने का आरोप

बैगा समाज ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति ‘बैगा’ के आर्थिक उत्थान के लिए सरकार द्वारा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी पदों पर बिना परीक्षा सीधी भर्ती का प्रावधान किया गया है, लेकिन बाहरी लोग फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। समाज का आरोप है कि इससे वास्तविक बैगा युवाओं के अधिकार और रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

समाज प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जिन लोगों को ‘बैगा’ प्रमाण पत्र जारी किए गए, उनका बैगा समुदाय से कोई सामाजिक या पारिवारिक संबंध नहीं है। उन्होंने तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों और एसडीएम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना वंशावली और राजस्व अभिलेखों की गहन जांच किए प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिए गए। बैगा समाज ने पूरे मामले की जांच राज्य स्तरीय जाति सत्यापन समिति से कराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। कलेक्टर ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने का आश्वासन दिया है।

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