रायपुर, 16 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ में धान की कटाई के बाद बचने वाले पैरा (पुआल) से तैयार की जाने वाली पैरा आर्ट अब महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बन रही है। इस कला के जरिए अनुपयोगी पैरा और धान का उपयोग कर महापुरुषों तथा देवी-देवताओं के आकर्षक 3D पोर्ट्रेट और कलाकृतियां बनाई जाती हैं। यह कला पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम लाहौद में जिला प्रशासन की पहल पर स्व-सहायता समूह की 40 महिलाओं को धान एवं पैरा आर्ट का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

प्रशिक्षण के बाद बांटे गए प्रमाण पत्र

प्रशिक्षण पूर्ण होने पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने प्रतिभागी महिलाओं को प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार की गई सुंदर कलाकृतियों का अवलोकन किया और उनके हुनर की सराहना करते हुए भविष्य में इस कला को आजीविका का मजबूत माध्यम बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

बिहान टीम दे रही गैर-कृषि आजीविका को बढ़ावा

जिला पंचायत की बिहान टीम के संयुक्त प्रयासों से जिले में गैर-कृषि आजीविका को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ महतारी संकुल संगठन, लाहौद के माध्यम से महिलाओं को यह प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे धान और पैरा से आकर्षक उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

प्रशिक्षण के बाद महिलाएं अब स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पैरा (पुआल) और धान से विभिन्न कलाकृतियां बनाकर अपनी आय बढ़ाने के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकेंगी।

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