रायपुर, 14 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस ने विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए घोषणा की कि इस पर 17 जुलाई को, जो सत्र का अंतिम दिन होगा, चर्चा कराई जाएगी।
राज्य गठन के बाद यह छत्तीसगढ़ विधानसभा में लाया गया 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले विपक्ष की ओर से नौ बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जा चुके हैं, लेकिन हर बार संबंधित सरकारें सदन में अपना बहुमत साबित करने में सफल रही हैं।
अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से विपक्ष सरकार की नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। वहीं सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों, योजनाओं और विकास कार्यों को सदन के सामने रखता है। चर्चा के बाद सदन में मतदान कराया जाता है और बहुमत मिलने पर अविश्वास प्रस्ताव स्वतः निरस्त हो जाता है।
इस बार कांग्रेस ने नकटी गांव बुलडोजर कार्रवाई, कानून व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मुद्दों को आधार बनाकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। विपक्ष का आरोप है कि इन मामलों में सरकार अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई है और इन मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाया जाएगा।
वहीं भाजपा सरकार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी कर ली है। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार ने जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में प्रभावी काम किया है और प्रदेश में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
विधानसभा के वर्तमान संख्या बल पर नजर डालें तो भाजपा के पास 54 विधायक, जबकि कांग्रेस के 35 विधायक हैं। इसके अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का एक विधायक है। ऐसे में सदन में बहुमत के आधार पर भाजपा सरकार की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
अब 17 जुलाई को होने वाली चर्चा पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना है।


