06 मई 2026 | कोलकाता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद Mamata Banerjee ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “मैं हारी नहीं हूं, मुझे हराया गया है।” ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी अप्रत्यक्ष रूप से धांधली के आरोप लगाए हैं। इस बयान के बाद राज्य में सरकार गठन और संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दावा किया है कि 9 मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण होगा। BJP नेता Suvendu Adhikari को मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं तो आगे संवैधानिक प्रक्रिया क्या होगी।
पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने कहा कि संवैधानिक नैतिकता के अनुसार यदि कोई सरकार जनता का विश्वास खो देती है, तो उसे पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं होता। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव परिणामों को चुनौती देनी है तो उसका उचित तरीका चुनाव याचिका दायर करना है, न कि पद पर बने रहने की जिद करना।
पिंकी आनंद के मुताबिक राज्यपाल चाहें तो मौजूदा स्थिति में फ्लोर टेस्ट का आदेश दे सकते हैं। यदि सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाती है तो मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 7 मई को विधानसभा भंग होने के बाद मौजूदा विधायकों की सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जाएगी और इसके बाद नई सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद पैदा हुए इस राजनीतिक और संवैधानिक गतिरोध पर अब सभी की नजर राज्यपाल और नई सरकार गठन की प्रक्रिया पर टिकी हुई है।


