नई दिल्ली, 11 जून 2026

मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आपत्ति के बाद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन खारिज किए जाने के खिलाफ कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। मामले पर गुरुवार को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सुनवाई होने की संभावना है।

कांग्रेस का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन राजनीतिक दबाव में और गैरकानूनी तरीके से निरस्त किया गया। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताते हुए चुनाव आयोग और न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग की है।

क्या है विवाद?

भाजपा ने दावा किया था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में तेलंगाना से जुड़े एक कानूनी मामले की जानकारी नहीं दी। इसी आधार पर आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन रद्द कर दिया।

हालांकि, कांग्रेस और मीनाक्षी नटराजन का कहना है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। उनका तर्क है कि संबंधित मामले में अदालत ने केवल नोटिस जारी किया था और अभी तक संज्ञान भी नहीं लिया गया है, इसलिए उसका खुलासा करना कानूनी रूप से आवश्यक नहीं था।

चुनाव आयोग से भी गुहार

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को ज्ञापन सौंपते हुए रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गलत और कानून के विरुद्ध बताया।

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जिस आधार पर नामांकन रद्द किया गया है, उसका चुनावी कानून में कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा संज्ञान लिए बिना किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित नहीं माना जा सकता।

कांग्रेस के सामने बढ़ी मुश्किल

मीनाक्षी नटराजन मध्य प्रदेश से कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा उम्मीदवार थीं। नामांकन पत्रों की अंतिम तिथि गुजर जाने के बाद उनका पर्चा रद्द हुआ है, इसलिए कांग्रेस अब किसी दूसरे उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतार सकती। ऐसे में पार्टी के लिए यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

मीनाक्षी ने लगाए गंभीर आरोप

बुधवार को मीनाक्षी नटराजन ने रिटर्निंग ऑफिसर पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि अधिकारी निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय सरकार के पक्ष में कार्य कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने भी पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।

अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं, जो इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक विवाद की दिशा तय कर सकते हैं। :::

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