11 मई 2026 | नई दिल्ली

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का असर चुनाव परिणामों पर पड़ा और इसका फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिला। थरूर ने कहा कि पश्चिम बंगाल में करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे, जिनमें से लगभग 34 लाख लोगों ने अपील दायर कर खुद को वैध मतदाता बताया, लेकिन मतदान से पहले अधिकांश मामलों का निपटारा नहीं हो सका।

स्टैनफर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान आयोजित ‘इंडिया, दैट इज भारत’ गोलमेज सम्मेलन में बोलते हुए शशि थरूर ने कहा कि लाखों लोग वोट देने के अधिकार से वंचित रह गए। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक हर अपील की अलग-अलग सुनवाई होनी थी, लेकिन मतदान से पहले केवल कुछ सौ मामलों का ही निपटारा हो पाया। थरूर के मुताबिक आज भी लगभग 31 से 32 लाख मामलों की सुनवाई लंबित है और संभव है कि भविष्य में इन लोगों को वैध मतदाता माना जाए, लेकिन वे इस चुनाव में मतदान नहीं कर सके।

थरूर ने चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बीजेपी की जीत का अंतर लगभग 30 लाख वोटों का रहा, जो लंबित अपीलों की संख्या के काफी करीब है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यह जांच का विषय है कि क्या बड़ी संख्या में योग्य मतदाता मतदान से वंचित रह गए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फर्जी, मृत, पलायन कर चुके या डुप्लिकेट मतदाताओं के नाम हटाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।

कांग्रेस सांसद ने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां SIR प्रक्रिया से कांग्रेस को राजनीतिक फायदा हुआ, क्योंकि लंबे समय से कथित तौर पर डुप्लिकेट और मल्टीपल वोटर एंट्री की शिकायतें सामने आती रही थीं। थरूर ने आरोप लगाया कि एक ही व्यक्ति के नाम कई बूथों पर दर्ज होने जैसे मामले पहले सामने आते रहे हैं, जिन्हें इस प्रक्रिया के जरिए हटाया गया। उन्होंने कहा कि केरल और तमिलनाडु में बहुत कम अपीलें आईं, जबकि पश्चिम बंगाल में 34 लाख अपीलें दर्ज हुईं, जो अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करती हैं।

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