नई दिल्ली, 15 जुलाई 2026
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के उस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिसमें कहा गया था कि महिला की सलवार उतारना और छाती दबाना अपने आप में रेप की कोशिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता बेहद जरूरी है और ऐसे मामलों में अदालतों को स्थापित दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने कोर्ट का ध्यान पटना हाई कोर्ट के हालिया आदेश की ओर दिलाया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायाधीशों की भी जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मामलों में पूर्व के फैसलों और दिशानिर्देशों का अध्ययन करें। अदालत ने सभी अदालतों और पुलिस अधिकारियों को यौन अपराधों से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय हैंडबुक का पालन करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी द्वारा तैयार न्यायिक संवेदनशीलता संबंधी रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट और सभी हाई कोर्टों की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए, ताकि न्यायिक अधिकारियों को ऐसे मामलों में उचित मार्गदर्शन मिल सके।
यह मामला 2008 की एक घटना से जुड़ा है। आरोप था कि एक फोटो स्टूडियो में महिला के साथ आरोपी ने दरवाजा बंद कर सलवार उतारने और यौन उत्पीड़न का प्रयास किया। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को रेप की कोशिश का दोषी ठहराया था, लेकिन पटना हाई कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रेप की कोशिश की सजा रद्द करते हुए इसे महिला की मर्यादा भंग करने का अपराध माना। इसी आदेश पर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है।