हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी सौतेले पिता की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि पीड़िता की गवाही भरोसेमंद और सुसंगत हो, तो केवल उसके बयान के आधार पर भी अपराध सिद्ध किया जा सकता है।
चीफ जस्टिस Ramesh Sinha और जस्टिस Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने आरोपी की अपील खारिज कर दी। आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे पॉक्सो एक्ट और आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि पीड़िता ने अपने बयान में लगातार एक जैसी बात कही और लंबी जिरह के बावजूद उसके बयान में कोई बड़ा विरोधाभास सामने नहीं आया। कोर्ट ने कहा कि बच्ची ने डर और धमकी के कारण घटना को छिपाया था, लेकिन चाइल्ड लाइन टीम के संपर्क में आने के बाद उसने पूरी घटना की जानकारी दी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध बेहद गंभीर प्रकृति के होते हैं और ऐसे मामलों में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। अदालत ने आरोपी की जमानत निरस्त करते हुए उसे चार सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।


