16 मई 2026 | गौरेला-पेंड्रा-मरवाही

छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में मनरेगा के तहत पशु शेड निर्माण के मूल्यांकन के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में तकनीकी सहायक तरुण ताम्रकार पर बड़ी कार्रवाई की गई है। जनपद पंचायत गौरेला में पदस्थ तकनीकी सहायक को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से उनके सभी पदीय दायित्वों से पृथक कर दिया है। यह कार्रवाई मीडिया में प्रकाशित खबर और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर की गई।

पशु शेड मूल्यांकन के बदले मांगे गए थे 5 हजार रुपये

जानकारी के अनुसार, हेतराम राठौर ने आरोप लगाया था कि उनके पिता धर्मलाल राठौर के नाम पर बने पशु शेड के मूल्यांकन के लिए तकनीकी सहायक द्वारा 5 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। आरोप है कि सौदे के तहत 4 हजार रुपये जनपद पंचायत कार्यालय की छत पर लिए गए थे।

रिश्वत के बाद भी लंबित रखी गई फाइल

पीड़ित का आरोप है कि रिश्वत देने के बावजूद संबंधित फाइल लंबे समय तक लंबित रखी गई और कार्य भी पूरा नहीं किया गया। तकनीकी सहायक की मांग और व्यवहार से परेशान होकर हेतराम राठौर ने पूरे लेनदेन का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।

वायरल वीडियो के बाद प्रशासन हरकत में

वीडियो वायरल होने और मामला सार्वजनिक होने के बाद जिला पंचायत प्रशासन हरकत में आया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए तकनीकी सहायक तरुण ताम्रकार को तत्काल प्रभाव से पद से अलग करने का आदेश जारी किया।

मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता पर उठे सवाल

इस घटना के बाद मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं का लाभ लेने के लिए कई बार उन्हें अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी का सामना करना पड़ता है।

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