रायपुर, 16 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के ईएनटी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक 6 वर्षीय मासूम की आहार नली (अन्ननली) में फंसे सिक्के को सफलतापूर्वक निकालकर उसकी जान बचा ली। यह जटिल प्रक्रिया समय रहते पूरी होने से बच्चे की हालत सामान्य हो गई।

जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के कोटा तहसील अंतर्गत ग्राम सरगोंड निवासी नरेंद्र खेलते समय गलती से सिक्का निगल गया। इसके बाद उसे कुछ भी निगलने में गंभीर परेशानी होने लगी। परिजन पहले उसे पेंड्रा के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सिम्स बिलासपुर रेफर किया गया।

अस्पताल पहुंचते ही रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने तत्काल एक्स-रे कर सिक्के की सटीक स्थिति का पता लगाया। इसके बाद एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने बच्चे को सामान्य एनेस्थीसिया दिया। ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय और सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी तकनीक के माध्यम से अत्यंत सावधानी से सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस सफलता पर चिकित्सकों की सराहना करते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग के बेहतर समन्वय, विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक की बदौलत इस आपात स्थिति का सफलतापूर्वक समाधान संभव हो सका। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य हर मरीज को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने अभिभावकों को सलाह दी कि छोटे बच्चों की पहुंच से सिक्के, बटन, बैटरी और अन्य छोटी वस्तुएं दूर रखें। यदि कोई बच्चा ऐसी वस्तु निगल ले और उसे गले में दर्द, लार टपकना, निगलने में कठिनाई या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपाय अपनाने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।

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