वॉशिंगटन, 07 जून 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नीति को दिशा देने वाले भारतीय मूल के टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ श्रीराम कृष्णन ने व्हाइट हाउस में अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि वह जून महीने के अंत में अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाएंगे और इसके बाद कुछ समय का ब्रेक लेकर AI से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों पर काम करेंगे।

सोशल मीडिया पर जारी बयान में श्रीराम कृष्णन ने कहा कि पिछले 18 महीनों के दौरान उन्हें अमेरिका की AI रणनीति को आकार देने का अवसर मिला। उन्होंने इसे अपने जीवन का बड़ा सम्मान बताते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन के साथ काम करना उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव रहा।

कृष्णन ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम पहलों में योगदान दिया। इनमें अमेरिकन AI एक्शन प्लान की रूपरेखा तैयार करना, वैश्विक स्तर पर AI साझेदारियों को बढ़ावा देना और नेशनल AI पॉलिसी फ्रेमवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी शामिल रही। उन्होंने फ्रांस, भारत, यूनाइटेड किंगडम और मध्य पूर्व सहित कई देशों में आयोजित AI समिट और कूटनीतिक बैठकों में अमेरिका का प्रतिनिधित्व भी किया।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तेजी से विस्तार ऊर्जा, डेटा सेंटर, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आम नागरिकों तक AI के लाभ पहुंचाने जैसी बड़ी चुनौतियां सामने ला रहा है। भविष्य में उनका फोकस ऐसे संस्थानों और पहलों के निर्माण पर रहेगा जो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को इन चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकें।

व्हाइट हाउस के AI और क्रिप्टो सलाहकार डेविड सैक्स ने भी कृष्णन के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि AI नीति, तकनीकी समझ और रणनीतिक सोच के क्षेत्र में कृष्णन की विशेषज्ञता प्रशासन के लिए बेहद मूल्यवान रही है। सैक्स ने संकेत दिया कि सरकार छोड़ने के बाद भी कृष्णन बाहरी सलाहकार के रूप में प्रशासन का मार्गदर्शन करते रह सकते हैं।

भारतीय-अमेरिकी उद्यमी श्रीराम कृष्णन इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, स्नैप और एक्स (X) जैसी प्रमुख टेक कंपनियों में वरिष्ठ नेतृत्व भूमिकाएं निभा चुके हैं। तकनीकी जगत में उन्हें AI विशेषज्ञ, निवेशक और टेक्नोलॉजी कमेंटेटर के रूप में जाना जाता है।

विश्लेषकों का मानना है कि कृष्णन की विदाई ट्रंप प्रशासन के AI एजेंडे के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में उनकी सक्रिय भूमिका आगे भी जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

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