बस्तर में “हरा सोना” कहे जाने वाले तेंदूपत्ता की खरीदी शुरू हो चुकी है। बड़ी संख्या में हितग्राही तेंदूपत्ता तोड़कर संग्रहण केंद्रों में बेच रहे हैं, लेकिन बेमौसम बारिश ने व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। लगातार बारिश के कारण हजारों गड्डियां भीग गई हैं, वहीं नमी बढ़ने से तेंदूपत्ता के बंडलों में दीमक लगने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे शासन को बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

कांकेर जिले में पिछले तीन दिनों से मौसम लगातार बदल रहा है। दिनभर तेज धूप रहने के बाद शाम होते ही आंधी और बारिश शुरू हो रही है। मौसम की इस आंखमिचौली का सीधा असर तेंदूपत्ता की तोड़ाई, खरीदी और भंडारण पर पड़ रहा है। तेज हवा और बारिश के चलते पत्तों के फटने का खतरा बढ़ गया है, जबकि संग्रहण केंद्रों में सुखाने के लिए रखे गए बंडल हवा में उड़कर टूट रहे हैं और बारिश में भीगने से उनमें नमी बढ़ती जा रही है।

जिला मुख्यालय से लगे ग्राम नवागांव स्थित एक संग्रहण केंद्र में अब तक करीब 60 हजार तेंदूपत्ता की खरीदी हो चुकी है। यहां लगभग 120 हितग्राही पंजीकृत हैं। लगातार बारिश के चलते केंद्र में रखे अधिकांश बंडल भीग गए हैं। नमी के कारण कई बंडलों में दीमक लगने लगी है, जिससे पत्तों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। स्थानीय स्तर पर तेंदूपत्ता को सुरक्षित रखने और बेहतर संरक्षण की मांग उठने लगी है।

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