नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद हरिवंश नारायण सिंह को एक बार फिर उच्च सदन का उपसभापति चुना गया है। यह लगातार तीसरी बार है जब उन्हें इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके निर्वाचन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उन्हें बधाई दी और उनके अनुभव की सराहना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हरिवंश के अनुभव और संतुलित कार्यशैली का लाभ सदन को मिलता रहेगा। उन्होंने इसे सदन द्वारा उनके प्रति विश्वास की पुनः पुष्टि बताया। पीएम ने यह भी कहा कि उनके नेतृत्व में राज्यसभा की कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी हुई है।

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी हरिवंश को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह इस पद के पूरी तरह योग्य हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नामित सदस्य के रूप में इस पद तक पहुंचना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरिवंश को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। यह सीट पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हुई थी। अब हरिवंश का कार्यकाल 2032 तक रहेगा।

69 वर्षीय हरिवंश का राजनीतिक सफर भी दिलचस्प रहा है। वर्ष 2014 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू की ओर से राज्यसभा के लिए नामित किया था, जिसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

उत्तर प्रदेश के बलिया में 30 जून 1956 को जन्मे हरिवंश का पैतृक संबंध बिहार के सिताब दियारा से है, जो लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जन्मस्थली है। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। छात्र जीवन में वे जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के विचारों से प्रभावित रहे और 1974 के जेपी आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।

हरिवंश के पुनर्निर्वाचन को उनके अनुभव, संतुलन और सदन संचालन की क्षमता का सम्मान माना जा रहा है।

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