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बहन की विदाई के लिए जेल से निकला कैदी, हाईकोर्ट ने मानवीय आधार पर दी बड़ी राहत

30june2026

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और मानवीय फैसला सुनाते हुए डकैती के मामले में 10 साल की सजा काट रहे कैदी को उसकी बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति दी है। हालांकि अदालत ने अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया, लेकिन पुलिस अभिरक्षा में विवाह स्थल तक ले जाने के निर्देश दिए हैं ताकि वह अपनी बहन की विदाई की पारंपरिक रस्में निभा सके।

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कहा कि सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों का सम्मान भी न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में कैदी को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बहन की विदाई में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए।

मामले के अनुसार, भिलाई के सुपेला कृष्णानगर निवासी मनीष बंसोर को डकैती और आपराधिक साजिश के मामले में विशेष अदालत ने 18 नवंबर 2025 को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। वर्तमान में वह जेल में बंद है।

मनीष ने हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत की मांग करते हुए कहा था कि उसकी सगी बहन की शादी है और परिवार में उसके अलावा कोई दूसरा भाई नहीं है, जो विदाई सहित पारिवारिक और सामाजिक परंपराओं को निभा सके। इसलिए उसे कुछ दिनों के लिए रिहा किया जाए।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी गंभीर अपराध में सजायाफ्ता है, इसलिए उसे खुली जमानत देना उचित नहीं होगा। हालांकि सरकार ने यह सुझाव भी दिया कि यदि न्यायालय चाहे तो आरोपी को पुलिस सुरक्षा में समारोह में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत की याचिका खारिज कर दी, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मनीष बंसोर को पुलिस अभिरक्षा में बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति प्रदान कर दी।

अदालत ने केंद्रीय जेल अधीक्षक और दुर्ग पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित तिथि पर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था के साथ कैदी को विवाह स्थल ले जाया जाए। विदाई की रस्म पूरी होने के तुरंत बाद उसे वापस जेल लाया जाएगा।

हाईकोर्ट के इस फैसले को न्यायिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों के संतुलन का एक अहम उदाहरण माना जा रहा है, जहां अदालत ने कानून की मर्यादा बनाए रखते हुए पारिवारिक भावनाओं का भी सम्मान किया।

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