रायपुर, 16 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान खाद (उर्वरक) आबंटन का मुद्दा गरमा गया। विधायक दलेश्वर साहू ने सहकारिता और निजी क्षेत्र को उर्वरक वितरण में असमानता का आरोप लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि उर्वरक आबंटन में सहकारिता को 48 प्रतिशत और निजी क्षेत्र को 52 प्रतिशत आवंटन दिखाया गया है, जबकि सरकार के जवाब में 70 प्रतिशत का उल्लेख है। उन्होंने इस विरोधाभास पर सवाल उठाया।
इस पर सहकारिता मंत्री रामविचार नेताम ने विधायक के आंकड़ों पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से तीन पन्नों में विस्तृत जवाब उपलब्ध कराया गया है, जिसमें कुल खाद भंडारण का 64 प्रतिशत सहकारिता क्षेत्र और 36 प्रतिशत निजी क्षेत्र के पास होना स्पष्ट है। मंत्री ने कहा कि गलत आंकड़ों के आधार पर सदन को गुमराह करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
विधायक दलेश्वर साहू ने आगे आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में लक्ष्य से अधिक खाद का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां 10 बोरी की मांग होती है, वहां 25 बोरी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने इस मामले की जांच समिति से कराने की मांग करते हुए कंपनियों पर सरकार के नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठाए।
जवाब में मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर पहले खाद उपलब्ध कराया जाता है, क्योंकि वहां समय पर आपूर्ति पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उर्वरक का आबंटन केंद्र सरकार करती है, जबकि राज्य सरकार केवल यह तय करती है कि किस क्षेत्र में पहले वितरण किया जाए।
इसके बाद विधायक साहू ने पूछा कि जहां 50 प्रतिशत से अधिक खाद का वितरण किया गया है, वहां क्या सरकार जांच कराएगी? इस पर मंत्री रामविचार नेताम ने दो टूक कहा कि जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि सरकार की प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार है।