Bombay High Court की नागपुर पीठ ने पुलिस की कथित बर्बरता और मानवीय गरिमा के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए Maharashtra Government को निर्देश दिया है कि वह एक वकील और एक सेवानिवृत्त सैनिक को 50-50 हजार रुपये का मुआवजा आठ सप्ताह के भीतर प्रदान करे।

खंडपीठ में शामिल Urmila Joshi-Phalke और Nivedita Mehta ने स्पष्ट कहा कि दोनों व्यक्तियों को हथकड़ी लगाकर सार्वजनिक रूप से घुमाना उनके सम्मान और मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। अदालत ने जोर देकर कहा कि कानून लागू करने वाले अधिकारियों को न केवल प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, बल्कि नागरिकों की गरिमा का भी सम्मान करना चाहिए।

कोर्ट ने पाया कि वकील योगेश्वर कावड़े और पूर्व सैनिक अविनाश दाते के साथ जो व्यवहार किया गया, वह अपमानजनक था और किसी भी नागरिक के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार्य नहीं हो सकता। अदालत ने इसे “अनावश्यक अपमान” और मानव गरिमा के खिलाफ गंभीर कार्रवाई बताया।

यह मामला महाराष्ट्र के अमरावती जिले का है, जहां वर्ष 2010 में दोनों शिकायत दर्ज कराने तालेगांव थाने पहुंचे थे। आरोप है कि पुलिस ने आधी रात के बाद उन्हें हिरासत में लिया और कथित रूप से उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया।

अगले दिन दोनों को हथकड़ी पहनाकर सार्वजनिक रूप से स्टेट ट्रांसपोर्ट बस के जरिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने कहा कि जब कानून के रक्षक ही इस तरह का आचरण करते हैं, तो इससे न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा गहराई से प्रभावित होता है।

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