रायपुर, 14 जुलाई 2026
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू किया गया है। इस पहल का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, वन सुरक्षा, मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
रियल-टाइम होगी जंगलों की निगरानी
परियोजना के तहत 70 से 80 फीट ऊंचे टावरों पर AI कैमरे और पीयर-टू-पीयर (P2P) मॉड्यूल लगाए जा रहे हैं। इनकी मदद से दूरस्थ और दुर्गम वन क्षेत्रों में 24 घंटे रियल-टाइम निगरानी की जाएगी।
संवेदनशील क्षेत्रों में शुरू हुआ ट्रायल
सिस्टम का प्रारंभिक ट्रायल कुल्हाडीघाट, इंदागांव, रिसगांव, दक्षिण उदंती और पायलीखण्ड उत्तर उदंती रेंज में किया जा रहा है। ये क्षेत्र हाथियों के आवागमन, वन्यजीव संरक्षण और अवैध तस्करी की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं।
AI खुद करेगा पहचान और भेजेगा अलर्ट
AI कैमरे हाथी, बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे वन्यजीवों की स्वतः पहचान करेंगे। साथ ही शिकारी, लकड़ी तस्कर, अवैध घुसपैठिए और अतिक्रमणकारियों की गतिविधियों का पता लगाकर व्हाट्सएप के माध्यम से वन कर्मियों और अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजेंगे।
दूरस्थ जंगलों तक पहुंचेगा इंटरनेट
P2P वायरलेस तकनीक के जरिए दूर-दराज के जंगलों में भी इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। मैनपुर क्षेत्र के 4G और 5G नेटवर्क को 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित एंटी-पोचिंग कैंपों और वन चौकियों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे निर्बाध वीडियो स्ट्रीमिंग और निगरानी संभव होगी।
कम स्टाफ में बढ़ेगी निगरानी क्षमता
वन विभाग में सीमित मानव संसाधन की चुनौती के बीच यह AI आधारित निगरानी प्रणाली फोर्स मल्टीप्लायर की तरह काम करेगी। इससे गश्त की क्षमता बढ़ेगी और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
पहले से आधुनिक तकनीकों का उपयोग
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पहले से थर्मल ड्रोन, उपग्रह चित्रों और Google Earth Engine आधारित तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। नई AI प्रणाली इन प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाएगी।
संरक्षण अभियान से मिले बेहतर परिणाम
रिजर्व ने पिछले चार वर्षों में 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है और 500 से अधिक तस्करों व शिकारियों को गिरफ्तार किया है। यहां बाघ, हाथी, मालाबार पाइप हॉर्नबिल, भारतीय विशाल गिलहरी, उड़न गिलहरी, पेरेग्रीन फाल्कन और ऊदबिलाव जैसी दुर्लभ प्रजातियों का भी सफल दस्तावेजीकरण हुआ है।
प्रत्येक टावर पर 3 लाख रुपये तक खर्च
परियोजना के तहत प्रत्येक AI टावर, P2P कनेक्टिविटी, स्मार्ट कैमरे और संबंधित सिविल कार्यों पर लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये की लागत आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना मध्य भारत में AI आधारित वन्यजीव संरक्षण की सबसे उन्नत पहलों में से एक साबित हो सकती है।